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हागà¥à¤—ै
जकरà¥à¤¯à¤¾à¤¹
मलाकी
मतà¥à¤¤à¥€
मरकà¥à¤¸
लूका
यूहनà¥à¤¨à¤¾
पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤à¥‹à¤‚ के काम
रोमियो
1 कà¥à¤°à¤¿à¤¨à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚
2 कà¥à¤°à¤¿à¤¨à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚
गलातियों
इफिसियों
फिलिपà¥à¤ªà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚
कà¥à¤²à¥à¤¸à¥à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚
1 थिसà¥à¤¸à¤²à¥à¤¨à¥€à¤•ियों
2 थिसà¥à¤¸à¤²à¥à¤¨à¥€à¤•ियों
1 तीमà¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥à¤¸
2 तीमà¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥à¤¸
तीतà¥à¤¸
फिलेमोन
इबà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚
याकूब
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2 पतरस
1 यूहनà¥à¤¨à¤¾
2 यूहनà¥à¤¨à¤¾
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यहूदा
पà¥à¤°à¤•ाशित वाकà¥à¤¯
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आदि में परमेशà¥à¤µà¤° ने आकाश और पृथà¥à¤µà¥€ की सृषà¥à¤Ÿà¤¿ की।
और पृथà¥à¤µà¥€ बेडौल और सà¥à¤¨à¤¸à¤¾à¤¨ पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अनà¥à¤§à¤¿à¤¯à¤¾à¤°à¤¾ था: तथा परमेशà¥à¤µà¤° का आतà¥à¤®à¤¾ जल के ऊपर मणà¥à¤¡à¤²à¤¾à¤¤à¤¾ था।
तब परमेशà¥à¤µà¤° ने कहा, उजियाला हो: तो उजियाला हो गया।
और परमेशà¥à¤µà¤° ने उजियाले को देखा कि अचà¥à¤›à¤¾ है; और परमेशà¥à¤µà¤° ने उजियाले को अनà¥à¤§à¤¿à¤¯à¤¾à¤°à¥‡ से अलग किया।
और परमेशà¥à¤µà¤° ने उजियाले को दिन और अनà¥à¤§à¤¿à¤¯à¤¾à¤°à¥‡ को रात कहा। तथा सांठहà¥à¤ˆ फिर à¤à¥‹à¤° हà¥à¤†à¥¤ इस पà¥à¤°à¤•ार पहिला दिन हो गया॥
फिर परमेशà¥à¤µà¤° ने कहा, जल के बीच à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ अनà¥à¤¤à¤° हो कि जल दो à¤à¤¾à¤— हो जाà¤à¥¤
तब परमेशà¥à¤µà¤° ने à¤à¤• अनà¥à¤¤à¤° करके उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया।
और परमेशà¥à¤µà¤° ने उस अनà¥à¤¤à¤° को आकाश कहा। तथा सांठहà¥à¤ˆ फिर à¤à¥‹à¤° हà¥à¤†à¥¤ इस पà¥à¤°à¤•ार दूसरा दिन हो गया॥
फिर परमेशà¥à¤µà¤° ने कहा, आकाश के नीचे का जल à¤à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में इकटà¥à¤ ा हो जाठऔर सूखी à¤à¥‚मि दिखाई दे; और वैसा ही हो गया।
और परमेशà¥à¤µà¤° ने सूखी à¤à¥‚मि को पृथà¥à¤µà¥€ कहा; तथा जो जल इकटà¥à¤ ा हà¥à¤† उसको उसने समà¥à¤¦à¥à¤° कहा: और परमेशà¥à¤µà¤° ने देखा कि अचà¥à¤›à¤¾ है।
फिर परमेशà¥à¤µà¤° ने कहा, पृथà¥à¤µà¥€ से हरी घास, तथा बीज वाले छोटे छोटे पेड़, और फलदाई वृकà¥à¤· à¤à¥€ जिनके बीज उनà¥à¤¹à¥€ में à¤à¤• à¤à¤• की जाति के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° होते हैं पृथà¥à¤µà¥€ पर उगें; और वैसा ही हो गया।
तो पृथà¥à¤µà¥€ से हरी घास, और छोटे छोटे पेड़ जिन में अपनी अपनी जाति के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बीज होता है, और फलदाई वृकà¥à¤· जिनके बीज à¤à¤• à¤à¤• की जाति के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° उनà¥à¤¹à¥€ में होते हैं उगे; और परमेशà¥à¤µà¤° ने देखा कि अचà¥à¤›à¤¾ है।
तथा सांठहà¥à¤ˆ फिर à¤à¥‹à¤° हà¥à¤†à¥¤ इस पà¥à¤°à¤•ार तीसरा दिन हो गया॥
फिर परमेशà¥à¤µà¤° ने कहा, दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अनà¥à¤¤à¤° में जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ हों; और वे चिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚, और नियत समयों, और दिनों, और वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ के कारण हों।
और वे जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ आकाश के अनà¥à¤¤à¤° में पृथà¥à¤µà¥€ पर पà¥à¤°à¤•ाश देने वाली à¤à¥€ ठहरें; और वैसा ही हो गया।
तब परमेशà¥à¤µà¤° ने दो बड़ी जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ बनाईं; उन में से बड़ी जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ को दिन पर पà¥à¤°à¤à¥à¤¤à¤¾ करने के लिये, और छोटी जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ को रात पर पà¥à¤°à¤à¥à¤¤à¤¾ करने के लिये बनाया: और तारागण को à¤à¥€ बनाया।
परमेशà¥à¤µà¤° ने उन को आकाश के अनà¥à¤¤à¤° में इसलिये रखा कि वे पृथà¥à¤µà¥€ पर पà¥à¤°à¤•ाश दें,
तथा दिन और रात पर पà¥à¤°à¤à¥à¤¤à¤¾ करें और उजियाले को अनà¥à¤§à¤¿à¤¯à¤¾à¤°à¥‡ से अलग करें: और परमेशà¥à¤µà¤° ने देखा कि अचà¥à¤›à¤¾ है।
तथा सांठहà¥à¤ˆ फिर à¤à¥‹à¤° हà¥à¤†à¥¤ इस पà¥à¤°à¤•ार चौथा दिन हो गया॥
फिर परमेशà¥à¤µà¤° ने कहा, जल जीवित पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से बहà¥à¤¤ ही à¤à¤° जाà¤, और पकà¥à¤·à¥€ पृथà¥à¤µà¥€ के ऊपर आकाश के अनà¥à¤¤à¤° में उड़ें।
इसलिये परमेशà¥à¤µà¤° ने जाति जाति के बड़े बड़े जल-जनà¥à¤¤à¥à¤“ं की, और उन सब जीवित पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की à¤à¥€ सृषà¥à¤Ÿà¤¿ की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहà¥à¤¤ ही à¤à¤° गया और à¤à¤• à¤à¤• जाति के उड़ने वाले पकà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की à¤à¥€ सृषà¥à¤Ÿà¤¿ की: और परमेशà¥à¤µà¤° ने देखा कि अचà¥à¤›à¤¾ है।
और परमेशà¥à¤µà¤° ने यह कहके उनको आशीष दी, कि फूलो-फलो, और समà¥à¤¦à¥à¤° के जल में à¤à¤° जाओ, और पकà¥à¤·à¥€ पृथà¥à¤µà¥€ पर बढ़ें।
तथा सांठहà¥à¤ˆ फिर à¤à¥‹à¤° हà¥à¤†à¥¤ इस पà¥à¤°à¤•ार पांचवां दिन हो गया।
फिर परमेशà¥à¤µà¤° ने कहा, पृथà¥à¤µà¥€ से à¤à¤• à¤à¤• जाति के जीवित पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥€, अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ घरेलू पशà¥, और रेंगने वाले जनà¥à¤¤à¥, और पृथà¥à¤µà¥€ के वनपशà¥, जाति जाति के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हों; और वैसा ही हो गया।
सो परमेशà¥à¤µà¤° ने पृथà¥à¤µà¥€ के जाति जाति के वन पशà¥à¤“ं को, और जाति जाति के घरेलू पशà¥à¤“ं को, और जाति जाति के à¤à¥‚मि पर सब रेंगने वाले जनà¥à¤¤à¥à¤“ं को बनाया: और परमेशà¥à¤µà¤° ने देखा कि अचà¥à¤›à¤¾ है।
फिर परमेशà¥à¤µà¤° ने कहा, हम मनà¥à¤·à¥à¤¯ को अपने सà¥à¤µà¤°à¥‚प के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° अपनी समानता में बनाà¤à¤‚; और वे समà¥à¤¦à¥à¤° की मछलियों, और आकाश के पकà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, और घरेलू पशà¥à¤“ं, और सारी पृथà¥à¤µà¥€ पर, और सब रेंगने वाले जनà¥à¤¤à¥à¤“ं पर जो पृथà¥à¤µà¥€ पर रेंगते हैं, अधिकार रखें।
तब परमेशà¥à¤µà¤° ने मनà¥à¤·à¥à¤¯ को अपने सà¥à¤µà¤°à¥‚प के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ किया, अपने ही सà¥à¤µà¤°à¥‚प के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° परमेशà¥à¤µà¤° ने उसको उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ किया, नर और नारी करके उसने मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ की सृषà¥à¤Ÿà¤¿ की।
और परमेशà¥à¤µà¤° ने उन को आशीष दी: और उन से कहा, फूलो-फलो, और पृथà¥à¤µà¥€ में à¤à¤° जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समà¥à¤¦à¥à¤° की मछलियों, तथा आकाश के पकà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, और पृथà¥à¤µà¥€ पर रेंगने वाले सब जनà¥à¤¤à¥à¤“ पर अधिकार रखो।
फिर परमेशà¥à¤µà¤° ने उन से कहा, सà¥à¤¨à¥‹, जितने बीज वाले छोटे छोटे पेड़ सारी पृथà¥à¤µà¥€ के ऊपर हैं और जितने वृकà¥à¤·à¥‹à¤‚ में बीज वाले फल होते हैं, वे सब मैं ने तà¥à¤® को दिठहैं; वे तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ à¤à¥‹à¤œà¤¨ के लिये हैं:
और जितने पृथà¥à¤µà¥€ के पशà¥, और आकाश के पकà¥à¤·à¥€, और पृथà¥à¤µà¥€ पर रेंगने वाले जनà¥à¤¤à¥ हैं, जिन में जीवन के पà¥à¤°à¤¾à¤£ हैं, उन सब के खाने के लिये मैं ने सब हरे हरे छोटे पेड़ दिठहैं; और वैसा ही हो गया।
तब परमेशà¥à¤µà¤° ने जो कà¥à¤› बनाया था, सब को देखा, तो कà¥à¤¯à¤¾ देखा, कि वह बहà¥à¤¤ ही अचà¥à¤›à¤¾ है। तथा सांठहà¥à¤ˆ फिर à¤à¥‹à¤° हà¥à¤†à¥¤ इस पà¥à¤°à¤•ार छठवां दिन हो गया॥
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